sagas – shauryasaga.com https://shauryasaga.com shaurya saga Wed, 26 Feb 2025 12:49:23 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://i0.wp.com/shauryasaga.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-logo1.png?fit=32%2C32&ssl=1 sagas – shauryasaga.com https://shauryasaga.com 32 32 230886147 अशोक चक्र (मरणोपरांत), 3 गोरखा राइफल्स लेफ्टिनेंट कर्नल जगन्नाथ रावजी चिटनिस (Ashok Chakra Hero- Lieutenant Colonel Chitnis Ashok Chakra) https://shauryasaga.com/ashokchakra-jagannath-chitnis/ https://shauryasaga.com/ashokchakra-jagannath-chitnis/?noamp=mobile#respond Fri, 23 Feb 2024 08:15:58 +0000 https://shauryasaga.com/?p=1103

लेफ्टिनेंट कर्नल जगन्नाथ रावजी चिटनिस Lieutenant Colonel Chitnis

अशोक चक्र (मरणोपरांत), 3 गोरखा राइफल्स

लेफ्टिनेंट कर्नल जगन्नाथ रावजी चिटनिस (आई सी-3472) का जन्म 20 अगस्त, 1918 को सतारा, महाराष्ट्र में हुआ था। उनके पिता का नाम डॉ. रावजी गोपाल चिटनिस था। उन्हें 12 अप्रैल, 1942 को 1/3 गोरखा राइफल्स में कमीशन मिला। अपने विशिष्ट सेवाकाल के दौरान उन्होंने कई पदक जीते।

  1. गोरखा राइफल्सजून, 1956 में लेफ्टिनेंट कर्नल चिटनिस नगा हिल्स में 1/3 गोरखा राइफल्स की कमान संभाले हुए थे। 14 जून को 8 जीपों के रक्षा दल के साथ मोकोकुचंग से जुन्हेबोटो जाते हुए, 21 माइल स्टोन के पास, उनकी प्लाटून पर करीब 100 नगा विद्रोहियों ने धावा बोल दिया। ये नगा विद्रोही लाइट मशीन गन, स्टेन गन और राइफलों से लैस थे। इस हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल चिटनिस और उनके चार सैनिक घायल हो गए और प्लाटून विद्रोहियों के बंकर से 150 मीटर पहले ही रूक गई। अगस्त 20, 1918 जून 14, 1956तब कमांडिंग अफसर ने विद्रोहियों के बंकर पर संगीन से हमले का आदेश दिया। उन्होंने आगे रहते हुए स्वयं हमले का नेतृत्व किया। अपनी स्टेन गन से उन्होंने एक विद्रोही को मार डाला और दूसरे को घायल कर दिया। इसी समय बाजू में स्थित एक लाइट मशीन गन ने उनकी प्लाटून पर घातक गोलीबारी की। पैर में चोट के बावजूद लेफ्टिनेंट कर्नल चिटनिस ने लाइट मशीन गन चौकी पर सामने से धावा बोल दिया। इस बार पेट में गोलियां लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए और विद्रोही चौकी से 15 मीटर पहले ही गिर पड़े। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे अपने सैनिकों को विद्रोहियों के खिलाफ लड़ने के लिए प्रोत्साहित करते रहे। उनके उदाहरण से प्रोत्साहित होकर सैनिक उत्साह के साथ लड़े और उन्होंने विद्रोहियों के ठिकाने को साफ कर दिया। 20 विद्रोही मारे गए और कई घायल हुए। लेफ्टिनेंट कर्नल जगन्नाथ रावजी चिटनिस ने न केवल अपने सैनिकों की जान बचाई अपितु शत्रु को भारी नुकसान पहुंचाया। वे अन्तिम सांस तक अपने जवानों का नेतृत्व करते रहे और इस प्रकार उन्होंने उत्कृष्ट नेतृत्व और वीरता का एक सुन्दर उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्हें मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।

                                            लेफ्टिनेंट कर्नल जगन्नाथ रावजी चिटनिस को मेरा सलाम।

Lieutenant Colonel Chitnis Ashok Chakra” Gorkha Rifles Sacrifice

Naga Hills 1956

                                                                                  जय हिन्द।

(साभार – गूगल , पराक्रम गाथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार, पेन टुडे, #shauryanamanfoundation)

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