ngo – shauryasaga.com https://shauryasaga.com shaurya saga Fri, 28 Feb 2025 13:07:41 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://i0.wp.com/shauryasaga.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-logo1.png?fit=32%2C32&ssl=1 ngo – shauryasaga.com https://shauryasaga.com 32 32 230886147 ब्रिगेडियर जोगिन्दर सिंह बक्शी (महावीर चक्र) Brigadier Joginder Singh Bakshi (Mahavir Chakra) https://shauryasaga.com/brigadier-joginder-singh-bakshi-mahavir-chakra%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d/ https://shauryasaga.com/brigadier-joginder-singh-bakshi-mahavir-chakra%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%b0-%e0%a4%9c%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d/?noamp=mobile#respond Fri, 28 Feb 2025 13:07:12 +0000 https://shauryasaga.com/?p=5334

शौर्य को नमन “जो वीरता की मिसाल बन गए, उनके बलिदान को हम कभी नहीं भूलेंगे।”

——-शौर्यनमन——- आई सी 4870 ब्रिगेडियर बक्शी, जोगिन्दर सिंह (महावीर चक्र)

आज हम याद करते हैं ब्रिगेडियर जोगिन्दर सिंह बक्शी (महावीर चक्र) को, जिनका जन्म 10 मार्च 1928 को कौंतिला (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके पिता श्री मान सिंह बक्शी के परिवार से कई सदस्यों ने भारतीय सेना में अपनी सेवा देकर नाम कमाया। ब्रिगेडियर बक्शी को 4 जून 1950 को जाट रेजिमेंट में कमीशन मिला और बाद में वे मेजर जनरल के पद तक पहुंचे।

‘मिज़ो हिल्स’ में उनकी शानदार सेवा के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित किया गया। लेकिन उनकी असली वीरता की गाथा 1971 के भारत-पाक युद्ध में सामने आई। पूर्वी मोर्चे पर 340 माउंटेन ब्रिगेड ग्रुप के कमांडर के रूप में उन्होंने अदम्य साहस और सैन्य कुशलता दिखाई। 6 दिसंबर 1971 को उन्हें पीरगंज में सड़क अवरोध स्थापित करने का आदेश मिला। इसके लिए नवाबगंज-चाँदीपुर-पीरगंज अक्ष पर आगे बढ़ना था।

ब्रिगेडियर बक्शी ने इस अभियान की योजना इतनी सूझबूझ से बनाई कि 7 से 16 दिसंबर के बीच दुश्मन के मजबूत ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान बोगरा जैसे प्रमुख नगर पर भी कब्जा किया गया। उनकी रणनीति और साहस ने दुश्मन को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। बड़ी संख्या में शत्रु सैनिक बंदी बनाए गए और एक ब्रिगेड कमांडर सहित दुश्मन का भारी साजो-सामान भी हाथ लगा।

इस असाधारण वीरता के लिए ब्रिगेडियर जोगिन्दर सिंह बक्शी को महावीर चक्र से नवाजा गया। उनका जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा है।

आइए, अपने शहीदों और वीरों को याद करें। शौर्य नमन जैसी संस्थाएं हमारे शहीदों के परिवारों के लिए काम कर रही हैं। आप भी इस नेक काम का हिस्सा बन सकते हैं।

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बलिदान दिवस -नायक जिदान बागे शौर्य चक्र (मरणोपरांत) https://shauryasaga.com/balidan-diwas-naik-jidan-bage-shaurya-chakra-posthumous/ https://shauryasaga.com/balidan-diwas-naik-jidan-bage-shaurya-chakra-posthumous/?noamp=mobile#respond Thu, 27 Feb 2025 10:23:51 +0000 https://shauryasaga.com/?p=5286

बलिदान दिवस – शौर्य नमन
नायक जिदान बागे
4255634Y | 18-01-1958 – 27-02-1991
शौर्य चक्र (मरणोपरांत)
वीरांगना: श्रीमती सुबाशी बारला
यूनिट: 7 बिहार रेजिमेंट
आतंकवाद विरोधी अभियान (पंजाब)

नायक जिदान बागे का जन्म 18 जनवरी 1958 को बिहार (अब झारखंड) के गुमला जिले के टाटी कुरकुरा गांव में हुआ। बचपन से ही उन्हें अपने भीतर की वीरता और साहस का अहसास था, और वे जानते थे कि इसका सच्चा उपयोग भारतीय सेना में ही हो सकता है। माता-पिता की इकलौती संतान होने के बावजूद, उनकी हिचक को दरकिनार करते हुए, 29 जुलाई 1977 को वे बिहार रेजिमेंट में रंगरूट बनकर सेना में शामिल हुए। प्रशिक्षण के बाद उन्हें 7 बिहार बटालियन में सिपाही के रूप में नियुक्त किया गया। 25 मार्च 1981 को उनका विवाह हुआ।

अपनी बटालियन के साथ विभिन्न चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में सेवा देते हुए वे नायक के पद तक पहुँचे। 80 और 90 के दशक में पंजाब आतंकवाद से अशांत था। 1991 में नायक जिदान बागे पंजाब में आतंकवाद विरोधी अभियानों का हिस्सा थे।

27 फरवरी 1991 को गोपनीय सूचना मिली कि लुधियाना जिले के राजेवाल गांव में गेहूं के खेतों में खूंखार आतंकवादी छिपे हैं। नायक जिदान बागे ने तुरंत अपने साथी सैनिकों के साथ मिलकर आतंकियों को घेर लिया और उन्हें आत्मसमर्पण करने की चुनौती दी। जवाब में आतंकियों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस अप्रत्याशित हमले में नायक जिदान बागे को संभलने का मौका नहीं मिला और वे कई गोलियों से गंभीर रूप से घायल हो गए।

फिर भी, अपने घावों और खून से लथपथ होने के बावजूद, उन्होंने अपनी जान की परवाह न करते हुए आतंकियों की ओर बढ़ना जारी रखा और गोलियां चलाते रहे। उनकी इस अद्भुत वीरता से उस मुठभेड़ में 5 आतंकी ढेर हुए। नायक जिदान बागे ने अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

उनके असाधारण साहस और दृढ़ संकल्प के लिए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। “Balidan Diwas – Naik Jidan Bage, Shaurya Chakra (Posthumous)”

आइए, उनके बलिदान को याद करें और शहीदों के परिवारों का सम्मान करें।
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#शौर्यनमन #बलिदानदिवस #भारतीयसेना #जयहिंद #आतंकवादविरोधी1991 #वीरोंकासम्मान

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“ऑपरेशन स्नो लेपर्ड: लांस दफादार विक्रम सिंह का शौर्य और बलिदान” https://shauryasaga.com/operation-snow-leopard-the-valor-and-sacrifice-of-lance-dafadar-vikram-singh/ https://shauryasaga.com/operation-snow-leopard-the-valor-and-sacrifice-of-lance-dafadar-vikram-singh/?noamp=mobile#respond Thu, 27 Feb 2025 09:35:52 +0000 https://shauryasaga.com/?p=5280

आज, 27 फरवरी 2025 को, हम लांस दफादार विक्रम सिंह नरूका की वीरता और बलिदान को याद करते हैं, जिन्होंने चार साल पहले इसी दिन देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। उनकी कहानी साहस, समर्पण और कर्तव्य के प्रति अटूट निष्ठा की मिसाल है—एक ऐसी गाथा जो हर उस भारतीय के दिल में गूंजती है जो हमारे सशस्त्र बलों की भावना को संजोता है।

विक्रम सिंह नरूका का जन्म राजस्थान के झुंझुनूं जिले की उदयपुरवाटी तहसील के भोड़की गांव में श्री घीसा सिंह नरूका के घर हुआ था। राजस्थान की कठिन भूमि पर पले-बढ़े विक्रम ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई पूरी की और फिर देश सेवा का पुकार सुनकर भारतीय सेना में कदम रखा। साल 2002 में वे आर्मर्ड कॉर्प्स में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए और एक ऐसी यात्रा शुरू की, जिसमें उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से ऊंचाइयों को छुआ।

प्रशिक्षण के बाद, विक्रम को 90 आर्मर्ड रेजिमेंट में सवार के पद पर नियुक्त किया गया, एक ऐसी इकाई जो अपने शौर्य और दृढ़ता के लिए जानी जाती है। सालों तक उन्होंने अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों और स्थानों पर अपनी सेवाएं दीं, बार-बार अपनी काबिलियत साबित की। उनकी निष्ठा ने उन्हें लांस दफादार के पद तक पहुंचाया, जो उनके कौशल और नेतृत्व का प्रमाण था।

साल 2021 में, लांस दफादार विक्रम सिंह को लद्दाख में “ऑपरेशन स्नो लेपर्ड” के तहत तैनात किया गया था, एक ऐसा मिशन जो दुनिया के सबसे कठिन माहौल में हमारे सैनिकों की सहनशक्ति की परीक्षा लेता है। दो महीने की छुट्टी के बाद, वे 30 जनवरी 2021 को अपनी यूनिट में लौटे, वही जोश और जुनून लेकर जो हमेशा उनके साथ था।

27 फरवरी 2021 को नियति ने एक दुखद मोड़ लिया। एक अन्य सैनिक के साथ गश्त के दौरान टैंक चलाते समय उनका वाहन अचानक खाई में गिर गया और पलट गया। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और उसी क्षण लांस दफादार विक्रम सिंह नरूका वीरगति को प्राप्त हो गए। उनका बलिदान केवल उनके परिवार के लिए नहीं, बल्कि हम सभी के लिए एक संदेश है कि हमारी सीमाओं की रक्षा के लिए हमारे सैनिक कितना बड़ा मूल्य चुकाते हैं।

उनकी पत्नी, वीरांगना श्रीमती प्रिया कंवर, जो स्वयं एक मजबूत स्तंभ हैं, उनके पीछे रह गईं। वे शहीदों के परिवारों की उस ताकत का प्रतीक हैं जो हर मुश्किल में डटकर सामना करती हैं।

बलिदान दिवस शौर्यनमन♛༒꧂
लांस दफादार विक्रम सिंह नरूका
15487120M
वीरांगना – श्रीमती प्रिया कंवर
यूनिट – 90 आर्मर्ड रेजिमेंट
ऑपरेशन स्नो लेपर्ड

इस बलिदान दिवस पर, शौर्य नमन जैसी संस्थाएं विक्रम सिंह जैसे वीरों को श्रद्धांजलि देती हैं, यह सुनिश्चित करते हुए कि उनकी कहानियां जीवित रहें और उनके परिवारों को वह सहारा मिले जिसके वे हकदार हैं। आप उनके प्रयासों के बारे में उनकी वेबसाइट (www.shauryanaman.com या www.shauryanaman.org) पर जान सकते हैं, या इंस्टाग्राम (@shauryanamanngo), फेसबुक (ShauryaNamanNGO), या यूट्यूब (shauryanaman) पर उन्हें फॉलो कर सकते हैं। जो लोग योगदान देना या संपर्क करना चाहते हैं, वे shauryanaman2019@gmail.com या +91 91110-10008 पर पहुंच सकते हैं।

आज लांस दफादार विक्रम सिंह नरूका को नमन करते हुए, आइए उन असंख्य वीरों को भी याद करें जो सियाचिन की बर्फीली चोटियों, कारगिल की ऊंचाइयों, या हमारी विशाल सीमाओं पर पहरा देते हैं। उनकी बहादुरी हमारा गर्व है, उनका बलिदान हमारी आजादी की नींव है। जय हिंद!

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