mejor vivek singh – shauryasaga.com https://shauryasaga.com shaurya saga Thu, 27 Feb 2025 11:26:48 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://i0.wp.com/shauryasaga.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-logo1.png?fit=32%2C32&ssl=1 mejor vivek singh – shauryasaga.com https://shauryasaga.com 32 32 230886147 सेना मेडल मेजर विवेक सिंह भंडराल https://shauryasaga.com/sena-madel-major-vivek-singh/ https://shauryasaga.com/sena-madel-major-vivek-singh/?noamp=mobile#respond Thu, 29 Aug 2024 14:23:42 +0000 https://shauryasaga.com/?p=5232 Army Medal Major Vivek Singh Bhandral
—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
मेजर विवेक सिंह भंडराल
16-01-1970 – 29-08- 2002
सेना मेडल (मरणोपरांत)
वीरांगना – श्रीमती शालिनी देवी
यूनिट – 21 पैराशूट रेजिमेंट (वाघनख)
ऑपरेशन पराक्रम 2002
मेजर विवेक सिंह भंडराल का जन्म 16 जनवरी 1970 को, कर्नल प्रीतम सिंह भंडराल एवं श्रीमती राजकुमारी भंडराल के परिवार में हुआ था। वह हिमाचल प्रदेश के निवासी थे। उन्हें भारतीय सेना की मराठा लाइट इंफेट्री रेजिमेंट की 9 बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था। वह कठोर परिश्रमी सैनिक थे, अतः उन्होंने पैरा कमांडो बनने का निर्णय लिया। कठोर कमांडो कोर्स पूर्ण करने के पश्चात उन्हें 21 पैरा बटालियन में नियुक्त किया गया था। वह मेजर के पद पर पदोन्नत हो गए थे। वर्ष 2002 में उनकी बटालियन को जम्मू कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में आतंकवाद से अति प्रभावित कुपवाड़ा जिले में तैनात किया गया था।
 
29 अगस्त 2002 को गोपनीय सूत्रों से कुपवाड़ा सेक्टर के एक गांव में आतंकवादियों के होने की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के आधार पर मेजर विवेक सिंह भंडराल के नेतृत्व में एक अन्वेषण व विनाश (SEARCH & DESTROY) ऑपरेशन आरंभ किया गया। मध्यान्ह लगभग 12:00 बजे जब अन्वेषण ऑपरेशन चल रहा था, उसी समय दो आतंकवादियों ने अन्वेषण टुकड़ी पर अंधाधुंध फायरिंग करते हुए घेरा तोड़कर भागने का प्रयास किया। मेजर विवेक सिंह सक्रिय हुए और त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए अति निकट से फायर कर एक आतंकवादी को मार दिया।
 
इसी मध्य, द्वितीय आतंकवादी पेड़ों के झुंड में कूद गया और प्रत्युत्तर में वहां से फायरिंग करने लगा। असाधारण साहस प्रदर्शित करते हुए मेजर विवेक सिंह ने हथगोला फेंक कर उस आतंकवादी पर आक्रमण किया, किंतु आगे बढ़ते समय उन्हें मशीनगन से घातक रूप से गोलियां लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। अपने घातक घावों और अत्यधिक रक्तस्राव पर ध्यान नहीं देते हुए वह उछले और द्वितीय आतंकवादी को भी मारकर वीरगति को प्राप्त हुए।
 
मेजर विवेक सिंह की इस वीरतापूर्ण कार्रवाई से उनकी टुकड़ी को दो आतंकवादियों को मारने में सफलता प्राप्त हुई साथ ही उन्होंने उत्कृष्ट नेतृत्व का एक उदाहरण स्थापित किया। उन्हें मरणोपरांत “सेना मेडल” से सम्मानित किया गया।
 
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