Army Medal Sepoy Sultan Singh Jat – shauryasaga.com https://shauryasaga.com shaurya saga Thu, 27 Feb 2025 11:46:31 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.9 https://i0.wp.com/shauryasaga.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-logo1.png?fit=32%2C32&ssl=1 Army Medal Sepoy Sultan Singh Jat – shauryasaga.com https://shauryasaga.com 32 32 230886147 सेना मेडल सिपाही सुल्तान सिंह जाट https://shauryasaga.com/sena-madel-sepoy-sultan-singh/ https://shauryasaga.com/sena-madel-sepoy-sultan-singh/?noamp=mobile#respond Fri, 23 Aug 2024 14:36:19 +0000 https://shauryasaga.com/?p=5208 Army Medal Sepoy Sultan Singh Jat
—— बलिदान दिवस -शौर्यनमन—–
सिपाही सुल्तान सिंह जाट
3196621
15-08-1985 – 22-08-2008
सेना मेडल (वीरगति उपरांत)
वीरांगना – स्व. श्रीमती सजना देवी
यूनिट – 45 राष्ट्रीय राइफल्स/12 जाट रेजिमेंट
आतंकवाद विरोधी अभियान
सिपाही सुल्तान सिंह का जन्म 15 अगस्त 1985 को राजस्थान के सीकर जिले की श्रीमाधोपुर तहसील के बागरियावास गांव, नया कुआं, मावलिया की ढाणी में श्री भैरूराम जाट (मावलिया) एवं श्रीमती जड़ाव देवी के परिवार में हुआ था। शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात 19 अक्टूबर 2001 को वह भारतीय सेना की जाट रेजिमेंट में रंगरूट के रूप में भर्ती हुए थे।
 
प्रशिक्षण के पश्चात उन्हें 12 जाट बटालियन में सिपाही के पद पर नियुक्त किया गया था। वर्ष 2008 में वह प्रतिनियुक्ति पर जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद विरोधी अभियानों में 45 राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन के साथ संलग्न थे।
 
22 अगस्त 2008 को, रात्रि के लगभग 3:30 बजे, जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले नौसार के घने और दुर्गम क्षेत्र में कुछ आतंकवादियों की उपस्थिति के संबंध में सूचना प्राप्त होने पर सिपाही सुल्तान सिंह अपने कमान अधिकारी कर्नल जोजन थॉमस के नेतृत्व में QUICK RESPONSE TEAM के सदस्यों के साथ निकल पड़े।
 
उसी समय, उन्हें अपने कुछ साथियों के घायल होने की सूचना प्राप्त हुई और उनका दल उस ओर बढ़ चला। भीषण मुठभेड़ में कमान अधिकारी ने सिपाही सुल्तान सिंह के साथ मिलकर तीन आतंकवादियों को मार दिया, किंतु इस मध्य गोलियां लगने से कमान अधिकारी घायल हो गए और चिकित्सा सहायता के लिए उन्हें तत्क्षण उस फायरिंग क्षेत्र से निकालना आवश्यक हो गया।
 
सिपाही सुल्तान सिंह ने आंतकवादियों की प्रचंड फायरिंग की घोर उपेक्षा करते हुए, घायल अधिकारी को वहां से निकाला, किंतु इस प्रक्रिया में वह स्वयं भी गंभीर रूप से घायल हो गए। अत्यधिक रक्त बह जाने के उपरांत भी अपने प्राणों की घोर उपेक्षा करते हुए उन्होंने अपने अधिकारी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और ऐसा करते हुए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया।
 
सिपाही सुल्तान सिंह ने अपनी जीवन सुरक्षा को ताक पर रखकर, उच्च स्तरीय वीरता, सैन्य सहयोग एवं सौहार्द का परिचय देते हुए भारतीय सेना की सर्वोच्च परंपराओं का मान रखा। इस वीरतापूर्वक कार्य के लिए 13 जनवरी 2010 को सिपाही सुल्तान सिंह को, वीरगति उपरांत सेना मेडल (वीरता) से अलंकृत किया गया।
Army Medal Sepoy Sultan Singh Jat सेना मेडल सिपाही सुल्तान सिंह जाट 
 
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