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Major Vivek Gupta MVC मेजर विवेक गुप्ता :कारगिल युद्ध के नायक ,महावीर चक्र 

टोलोलिंग चोटी पर भारतीय तिरंगा फहराने वाला सूरमा

Major Vivek Gupta MVC मेजर विवेक गुप्ता (2 जनवरी 1970 – 13 जून 1999) भारतीय सेना के एक अत्यंत वीर अधिकारी थे, जिन्हें 1999 के कारगिल युद्ध (ऑपरेशन विजय) में उनके अदम्य साहस और नेतृत्व के लिए मरणोपरांत भारत के दूसरे सर्वोच्च युद्धकालीन सैन्य सम्मान महावीर चक्र (MVC) से सम्मानित किया गया था। वह 2 राजपूताना राइफल्स (2 Raj Rif) बटालियन का हिस्सा थे।

प्रारंभिक जीवन और सैन्य यात्रा

Major Vivek Gupta MVC
Major Vivek Gupta MVC
  • जन्म और परिवार: मेजर विवेक गुप्ता का जन्म 2 जनवरी 1970 को देहरादून, उत्तराखंड में हुआ था। उनके पिता भी सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल बीआरएस गुप्ता थे।

  • शिक्षा और कमीशन: उन्होंने नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) और इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) से प्रशिक्षण प्राप्त किया। 13 जून 1992 को, उन्हें अपने शौर्य के लिए प्रसिद्ध इन्फैंट्री रेजिमेंट राजपूताना राइफल्स में कमीशन मिला।

  • विवाह और सेवा: 1997 में, उन्होंने सेना अधिकारी कैप्टन राजश्री बिष्ट से विवाह किया। उन्हें उनकी असाधारण क्षमताओं के लिए चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (COAS) कमेंडेशन कार्ड से भी नवाजा गया था और वह महू के इन्फैंट्री स्कूल में एक हथियार प्रशिक्षक के रूप में नियुक्त किए गए थे।

कारगिल युद्ध में वीरता (जून 1999)

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जब भारतीय सेना के पास घुसपैठ की सीमा के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं थी, तब 2 राजपूताना राइफल्स को युद्ध में उतारा गया। Major Vivek Gupta मेजर विवेक गुप्ता और उनकी चार्ली कंपनी को द्रास सेक्टर में टोलोलिंग चोटी (Point 4590) पर स्थित शत्रु चौकियों पर फिर से कब्जा करने का महत्वपूर्ण और खतरनाक मिशन सौंपा गया।

यह मिशन बहुत कठिन था क्योंकि दुश्मन एक ऊँचे और सुरक्षित स्थान पर डटा हुआ था, जिससे वे नीचे की ओर चढ़ने वाले भारतीय सैनिकों पर आसानी से हमला कर सकते थे।

टोलोलिंग पर निर्णायक हमला

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13 जून 1999 को, जब 2 राजपूताना राइफल्स ने टोलोलिंग टॉप पर बटालियन हमला शुरू किया, मेजर विवेक गुप्ता अग्रणी चार्ली कंपनी की कमान संभाल रहे थे।

  1. भारी गोलीबारी का सामना: भारी तोपखाने और स्वचालित हथियारों की गोलीबारी के बावजूद, मेजर गुप्ता के नेतृत्व में कंपनी दुश्मन के करीब पहुँचने में सफल रही।

  2. तीव्र जवाबी हमला: जैसे ही कंपनी खुले में आई, उन पर कई दिशाओं से तीव्र गोलीबारी हुई, जिससे कंपनी के तीन जवान घायल हो गए और हमला अस्थायी रूप से रुक गया।

  3. साहसी नेतृत्व: Major Vivek Gupta को पता था कि खुले में रुकना अधिक नुकसानदायक होगा। उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया व्यक्त की और दुश्मन की चौकी पर रॉकेट लॉन्चर से फायर किया।

  4. आमने-सामने की भीषण लड़ाई: इससे पहले कि स्तब्ध दुश्मन संभल पाता, Major Vivek Gupta ने दुश्मन की चौकी की ओर दौड़ लगा दी। इस दौरान, उन्हें दो गोलियाँ लगीं, लेकिन उन्होंने आगे बढ़ना जारी रखा। चौकी पर पहुँचकर, उन्होंने अपनी चोटों के बावजूद दुश्मन के साथ भयंकर आमने-सामने की लड़ाई की और तीन शत्रु सैनिकों को मार गिराया।

  5. चोटी पर कब्जा: अपने अधिकारी के वीरतापूर्ण कार्य से प्रेरणा लेकर, कंपनी के बाकी सैनिकों ने दुश्मन की चौकी पर हमला कर दिया और उस पर कब्जा कर लिया

सर्वोच्च बलिदान: हालांकि, इस भीषण मुकाबले के दौरान, मेजर विवेक गुप्ता को दुश्मन की एक और गोली लगी और वह अंततः अपनी चोटों के कारण शहीद हो गए। यह ठीक उसी दिन हुआ जब उन्होंने आठ साल पहले राजपूताना राइफल्स में कमीशन प्राप्त किया था।

Major Vivek Gupta MVC मेजर विवेक गुप्ता का यह असाधारण पराक्रम और प्रेरणादायक नेतृत्व ही टोलोलिंग चोटी पर कब्जा करने का मुख्य कारण बना।

महावीर चक्र से सम्मान

महावीर चक्र MVC

राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान और विशिष्ट वीरता के लिए, उन्हें 15 अगस्त 2000 को तत्कालीन राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

Major Vivek Gupta मेजर विवेक गुप्ता की कहानी भारतीय सेना के ‘सर्वप्रथम कर्तव्य’ की भावना का प्रतीक है और वह हमेशा देश की युवा पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे।

Major Vivek Gupta MVC

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